तो क्या ओड-इवेन बना पायेगा वातावरण को इवेन?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल एक बार फिर से सुर्ख़ियों में हैं. जी नहीं इस बार उनके मीम्स को लेकर नहीं बल्कि ओड-इवेन स्कीम को लेकर. एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अरविंद केजरीवाल ने इस फैसले की घोषणा की, कि दिल्ली में वाहन नियमों को लेकर ओड-इवेन स्कीम 4 नवम्बर से 15 नवम्बर तक लागू की जाएगी. इससे पहले भी दिल्ली में 1 जनवरी से 15 जनवरी 2016 में ओड-ईवेन लागू हो चूका है.
है क्या ओड-इवेन?
इस योजना के तहत दिल्ली में ओड नंबर से पंजीकृत गाड़ियाँ ओड वाले दिनों में और इवेन नंबर वाली गाड़ियाँ इवेन वाले दिन ही सड़कों पर चल सकेंगी. इससे सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों की संख्या आधी हो जाएगी. और ट्रैफिक कम होगा.
क्या कहना है केजरीवाल का?
केजरीवाल का कहना है, की देश का दिल कहे जाने वाली दिल्ली सर्दियों में धुएं और स्मोग से पीड़ित रहती है. और इस योजना से तकरीबन 15% तक प्रदूषण कम हो जायेगा. और जिस तरह से दिल्ली एक गैस चैम्बर बन जाती है, तो दिल्ली सरकार सिर्फ बैठ कर तमाशा तो नहीं देख सकती.
साथ ही दिल्ली सरकार ने लोगों से दिवाली पर पटाखे ना जलाने और सर्दियों में पौधे लगाने की अपील की है. इसके अलावा हॉट-स्पॉट ज़ोन बनवाने का भी एलान किया. केजरीवाल ने बताया कि उन 12 जगहों पर जहाँ प्रदुषण का स्तर बहुत ज्यादा होता है वहां हॉट-स्पॉट ज़ोन बनाये जायेंगे. और लगभग 1000 इलेक्ट्रॉनिक बसों के चलने की भी बात कही.
दरअसल दिल्ली में सरकार के पास लगभग साढ़े 4 महीनों का समय बचा है. विपक्ष का मानना है, कि चर्चा में बने रहने के लिए केजरीवाल सरकार ये क़दम उठा रही है. इन सब में अच्छी बात ये है, कि अगर दिल्ली सरकार ओड-इवेन लागू कर, लोगों से पौधे लगवा सकती है तो प्रकृति को इससे अच्छा फायदा हो सकता है. क्योंकि जो प्रकृति का इस वक़्त सूरत-ए-हाल है, उसमे इसी तरह के क़दमों की ज़रूरत है और जो प्रकृति को एक बार फिर से सवारने में मददगार साबित हो सकते हैं.



